आदित्यपुर/ Parmeshwar Gorai सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की लागत कम करने और उनकी प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से गुरुवार को आदित्यपुर ऑटो क्लस्टर सभागार में “कॉस्ट एंड कम्पेटिटिव ऑफ एमएसएमई इन इंडिया” विषय पर एक दिवसीय क्लस्टर स्तरीय वर्कशॉप आयोजित की गई.

कार्यक्रम में उद्यमियों से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी चुनौतियों, जरूरतों और सुझावों को विस्तार से जाना गया. वर्कशॉप में एकत्रित सभी सुझावों को संकलित कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा, जिन पर प्रधानमंत्री स्वयं एमएसएमई प्रतिनिधियों से संवाद कर राष्ट्रीय नीति निर्माण में शामिल करेंगे.
विशेषज्ञों ने कहा कि लघु उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन छोटे उद्यमियों की आवाज अक्सर नीति-निर्माताओं तक नहीं पहुंच पाती. वर्कशॉप के दौरान वित्तीय सहायता, तकनीकी दक्षता, लाइसेंसिंग में जटिलता और नियमों के सरलीकरण जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से उभरकर सामने आए.

उद्यमियों ने बताया कि विभिन्न लाइसेंस और अनुमतियां प्राप्त करने में अत्यधिक समय और प्रक्रिया की कठिनाई उद्योग के संचालन में बड़ी बाधा बनती है. विशेषज्ञों ने इन समस्याओं के व्यवहारिक समाधान के सुझाव भी प्रस्तुत किए.
इस अवसर पर एमएसएमई निदेशक इंद्रजीत यादव, उपनिदेशक पवन कुमार सिंह (एमएसएमई मंत्रालय, दिल्ली), ज्वाइंट कमिश्नर (सेंट्रल जीएसटी) अभिनव कुमार, जीएम (डीआईसी) सहित कई विशेषज्ञ मौजूद थे.
कार्यक्रम में एशिया के अध्यक्ष इंदर अग्रवाल, इसरो के अध्यक्ष रूपेश कतरियार, सिंहभूम चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष मानव केडिया, तापस साहू, रवि प्रसाद, सुरेंद्र शर्मा, प्रवीण गुटगुटिया, विनोद सिंह, राजेंद्र गोलछा, गौतम महापात्रा और सुधीर सिंह समेत अनेक उद्योगपति एवं उद्यमी उपस्थित रहे.

