आदित्यपुर/ Aman Kumar नगर निगम चुनाव में इन दिनों मेनिफेस्टो की बरसात हो रही है. खासकर वार्ड 17 में प्रत्याशियों के घोषणा पत्र चर्चा से ज्यादा चुटकुलों का विषय बन गए हैं. कोई पूरे वार्ड के विकास का सारा क्रेडिट खुद की झोली में डाल रहा है तो कोई विकास की गंगा बहाने का वादा कर रहा है. हालात ऐसे हैं मानो अगला स्विटजरलैंड आदित्यपुर के इसी वार्ड में बसने वाला हो.

जनता हालांकि खामोश है लेकिन अनजान नहीं है. उसे मालूम है कि मेनिफेस्टो का चुनाव बाद क्या हश्र होता है. कई वादे ऐसे हैं जो तब तक पूरे नहीं हो सकते जब तक राज्य या केंद्र सरकार विशेष योजना न लाए. लेकिन चुनावी मौसम है, इसलिए सपनों की कोई सीमा नहीं है.
पहले प्रत्याशी की बात करें तो कभी पार्षद रह चुके हैं. उनके मेनिफेस्टो को देखकर ऐसा लगता है कि वार्ड 17 का पूरा रोडमैप उन्हीं के कार्यकाल में बना. दिलचस्प यह है कि पिछली बार जनता ने उन्हें नकार दिया था और करीब आठ साल तक वह मैदान से बाहर रहे. इस बार निर्वाचन आयोग ने उन्हें बल्ला थमा दिया है. नेताजी बल्ला घुमाने की तैयारी में हैं, लेकिन जनता देख रही है कि रन बनेंगे या फिर विकेट जल्दी गिर जाएगा.
दूसरे प्रत्याशी खुद को बड़ा सामाजिक और शिक्षित चेहरा बताते हैं. पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर और 25 वर्षों से वार्ड निवासी होने का दावा करते हैं. मेनिफेस्टो में योग्यता इतनी भरी है कि मानो रिज्यूमे छप गया हो. मगर चर्चा इस बात की है कि शराब के सरकारी ठेके का जिक्र गायब है. निर्वाचन आयोग ने उन्हें साइकिल पंप चुनाव चिन्ह दिया है. अब वार्ड में हवा भरेगी या सिर्फ पोस्टरों में, यह देखना बाकी है.
तीसरे प्रत्याशी बड़े खिलाड़ी माने जाते हैं. नगर निगम की पिच पर पांच साल चौके-छक्के लगाने का दावा है. लेकिन अपने ही वार्ड की परीक्षा में मैदान से दूर रहे. अब बॉडीगार्ड के साथ डोर-टू-डोर प्रचार कर रहे हैं. उनका चुनाव चिन्ह बेबी वॉकर है. जनता कह रही है कि देखना यह है कि वॉकर से वार्ड आगे बढ़ेगा या फिर वहीं घूमता रहेगा.
चौथे प्रत्याशी अवकाश प्राप्त सरकारी कर्मी हैं. विधायक का चुनाव लड़ चुके हैं और जमानत जब्त हो चुकी है. अब वार्ड की राजनीति में नई पारी खेल रहे हैं. बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर रहे हैं, मगर अब तक विकास में अपनी भूमिका स्पष्ट नहीं कर पाए हैं. निर्वाचन आयोग ने उन्हें ब्लैकबोर्ड चुनाव चिन्ह दिया है. जनता कह रही है कि इस बार हिसाब-किताब भी उसी पर लिखा जाएगा.
पांचवें प्रत्याशी युवा जोश के साथ मैदान में हैं. तेवर ऐसे हैं मानो जीत पक्की हो. मेनिफेस्टो में विचारधारा की चमक है और भाषणों में उग्रता. चुनाव चिन्ह अलमारी मिला है. लोग कह रहे हैं कि देखना यह है कि चुनाव बाद वादे अलमारी में बंद होते हैं या काम बाहर निकलता है. संघी विचार धारा से जनता परिचित है.
और अंत में पांचवीं प्रत्याशी, जो निवर्तमान पार्षद हैं. बिना तामझाम, बिना बड़े काफिले, पैदल प्रचार करती नजर आ रही हैं. न कोई बड़ी घोषणाओं की बारिश, न बड़े-बड़े सपने. पांच साल के कार्यकाल में बोर्ड से पारित योजनाओं को जमीन पर उतारने का दावा है. न भ्रष्टाचार का आरोप, न कोई बड़ा विवाद. चुनाव चिन्ह मोतियों का हार है. अब यह हार किसके गले पड़ेगा, इसका फैसला वार्ड 17 की जनता करेगी.
कुल मिलाकर वार्ड 17 में चुनाव कम और व्यंग्य ज्यादा चल रहा है. बल्ला, पंप, वॉकर, ब्लैकबोर्ड, अलमारी और मोतियों का हार. सब मैदान में हैं. अब देखना है कि जनता किस प्रतीक पर मुहर लगाकर असली खेल का नतीजा तय करती है.

