आदित्यपुर: थाना क्षेत्र में धनबल और बाहुबल का जोर एकबार फिर से हावी होने लगा है. इसबार झामुमो नेता गणेश महाली सुर्खियों में हैं. जहां वे अपने बाहुबल के जोर पर पार्टी की छवि खराब करने में जुटे हैं. इसपर पार्टी के तमाम बड़े नेताओं की चुप्पी संकेत दे रहा है कि झामुमो भी बीजेपी की राह पर है. यदि यही हाल रहा तो झामुमो को भी बीजेपी की तरह कहीं सत्ता के लिए तरसना न पड़ जाए.

दरअसल मामला सरायकेला के आदित्यपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है. जहां सालडीह बस्ती रोड में नेशनल इलेक्ट्रॉनिक के समीप एक जमीन के टुकड़े को हथियाने के लिए झामुमो नेता गणेश महाली पार्टी के सिंबल और बैनर का प्रयोग कर रहे हैं. हालांकि मामला थाना पहुंचने पर थानेदार ने सीओ को जांच करने का निर्देश दिया है साथ ही जांच रिपोर्ट आने तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है मगर 12 घंटे के भीतर ही उक्त भूखंड के अंदर पार्टी का झंडा और कुर्सियां घुसा कर गणेश महाली द्वारा एक बड़े षड्यंत्र की तैयारी शुरू कर दी गई है. थाना गश्ती दल की मौजूदगी में सारी घटना घटित हुई जो कहीं न कहीं बड़ा खेल की ओर इशारा कर रही है. इसपर निर्णय अब पार्टी के बड़े नेताओं को लेना है कि क्या वे गणेश महाली के इस षड्यंत्र में साथ देते हैं या हाल ही में संपन्न हुए पार्टी के महाधिवेशन में सीएम हेमंत सोरेन द्वारा दिए गए ज्ञान का अनुपालन करते हैं. जिसमें मुख्यमंत्री ने झामुमो की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर उभारने का निर्देश दिया है.
गणेश महाली ने दावा किया है कि उक्त जमीन उनकी है. जिसके सारे वैद्य दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं. यदि ऐसा है तब जब वे बीजेपी में थे उस वक्त उन्होंने कब्जा क्यों नहीं किया ? खबर है कि उस वक्त भी बीजेपी के बड़े नेताओं ने उनका घोर विरोध कर दिया था जिसके बाद उन्होंने अपने कदम पीछे खींच लिए थे. अब जब वे झामुमो में हैं और सत्ता में झामुमो की सरकार है तो वे एकबार फिर से पार्टी के सिंबल का दुरुपयोग कर जमीन हथियाने में जुटे हैं.
उधर जमीन के पहले दावेदार विवेक उपाध्याय का कहना है कि उनके पास जमीन से जुड़े सारे दस्तावेज हैं. उन्होंने जिनसे जमीन खरीदी हैं वे आज भी उनके साथ खड़े हैं. बाहुबल और पार्टी का धौंस दिखाकर गणेश महाली द्वारा लगातार उन्हें परेशान किया जा रहा है. पिछली बार भी उन्होंने ऐसा ही किया था मगर बीजेपी के नेताओं ने उनके इस अनैतिक कार्य में साथ नहीं दिया था मगर आज झामुमो के नेता उनके साथ खड़े हैं जिससे उन्हें अपनी जमीन लुटने का डर सता रहा है. यदि निष्पक्ष जांच हुई तो उनकी जमीन बच सकती है. मगर थानेदार का रवैया सहयोगात्मक नजर नहीं आ रहा है. उन्होंने बताया कि गरीब होने का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है आज यदि मेरे हाथ से जमीन छिन जाती है तो मेरा पूरा परिवार रोड पर आ जायेगा. गणेश महाली को ये भी नहीं पता है कि जिस जमीन पर वे दावा कर रहे हैं उसका मूल रकबा कितना है. उसका टैक्स और बिजली बिल किसके नाम से आ रहा है. बस बाहुबल और पार्टी के लोगों को आगे करके वे मेरे जमीन को कानूनी पचड़े में फंसाकर हथियाना चाहते हैं. मगर नीचे वाला साथ दें न दें ऊपरवाला इंसाफ जरूर करेगा.
इस प्रकरण से गणेश महाली के राजनीतिक छवि पर एकबार फिर से ग्रहण लगता नजर आने लगा है. विदित हो कि गणेश महाली बीजेपी में रहते दो बार सरायकेला सीट से चुनाव लड़े और हार गए. तीसरी बार झामुमो के टिकट से चुनाव लड़े इसमें भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा. तीनों बार उन्हें चंपाई सोरेन ने हराया. दो बार चंपाई ने झामुमो के टिकट पर चुनाव लड़कर हराया तीसरी बार बीजेपी के टिकट से चुनाव लड़कर हराया. ऐसी बात नहीं है कि गणेश महाली जनता के बीच लोकप्रिय नहीं हैं मगर उनकी एक छवि ऐसी है जो आजतक उन्हें विधायक बनने नहीं दे रही है. इस कृत्य से एकबार फिर से उनकी राजनीतिक छवि पर ग्रहण लग सकता है साथ ही पार्टी की छवि भी धूमिल होने की प्रबल संभावना है. अब देखना यह दिलचस्प होगा कि पार्टी आलाकमान इस मामले पर क्या स्टैंड लेती है.

