आदित्यपुर: झामुमो नेता गणेश महाली अपनी हरकतों से पार्टी की छवि पर बट्टा लगाने की पूरी तैयारी में हैं. दरअसल महाली पर आदित्यपुर थाना अंतर्गत सालडीह बस्ती रोड स्थित नेशनल इलेक्ट्रॉनिक के पीछे एक जमीन को गलत तरीके से हड़पने का आरोप लगा है. आरोप यह भी है कि झामुमो नेता उस जमीन को कब्जा करने के लिए पार्टी का झंडा- बैनर का प्रयोग कर रहे हैं. वैसे पार्टी के बड़े नेताओं ने इसपर चुप्पी साध ली है. नाम नहीं बताने की शर्त पर पार्टी के एक नेता ने बताया कि उन्हें यह कहकर थाना ले जाया गया था कि पार्टी का कार्यालय खोलना है, एक व्यक्ति विरोध कर रहा है इसलिए थाना चलना है. मगर, थाना पहुंचने के बाद जब सच्चाई पता चला तो हम लोग पीछे हट गए हैं और पार्टी आलाकमान को पूरे मामले से अवगत करा दिया गया है.

हालांकि महाली ने दावा किया है कि उक्त जमीन उनकी है और साल 2023 में उन्होंने श्रीकांत कुंभकार से जमीन खरीदा है. सोमवार को महाली तथाकथित जमीन मालिक श्रीकांत कुंभकार के साथ आदित्यपुर थाना पहुंचे और जमीन से जुड़े दस्तावेज थाना प्रभारी को मुहैया कराया उसके बाद झामुमो नेता अंचल कार्यालय भी गए वहां भी उन्होंने दस्तावेज जमा कराए हैं. इधर श्रीकांत कुंभकार ने बताया कि जमीन के मूल मालिक वे हैं और साल 2001 से 2022 तक उक्त जमीन उनके कब्जे में थी. 2023 में उन्होंने जमीन गणेश महाली को बेचा है तब से उस जमीन पर गणेश महाली का कब्जा है. उनकी बातों में कितनी सच्चाई है इसका खुलासा हम आगे करेंगे.
श्रीकांत कुंभकार (तथाकथित जमीन मालिक)
इधर गणेश महाली ने बताया कि उनकी राजनीतिक छवि को खराब करने के उद्देश्य से विपक्ष के इशारे पर इस मामले को तूल दिया जा रहा है जबकि वे किसी अर्जुन सिंह वालिया और विवेक उपाध्याय को नहीं जानते हैं. उक्त जमीन को उन्होंने चेक के माध्यम से श्रीकांत कुंभकार से 2023 में खरीदा है. उनके नाम से होल्डिंग टैक्स और बिजली कनेक्शन आज भी बहाल है. मैंने कोई अवैध कब्जा नहीं किया है.
गणेश महाली (झामुमो नेता)
इधर सोमवार देर रात अर्जुन सिंह वालिया और विवेक उपाध्याय आदित्यपुर थाना पहुंचे और थाना प्रभारी से मिलकर दस्तावेज उपलब्ध कराते हुए पूरे मामले से अवगत कराया. इस दौरान उनके साथ जमशेदपुर के सिख समुदाय के बड़े नेता और एक बड़े राजनीतिक दल के नेता भी मौजूद थे. थानेदार ने दोनों पक्षों को मंगलवार को पुनः तलब करने की बात कही है. वहीं मीडिया से बातचीत करते हुए अर्जुन सिंह वालिया ने बताया कि जिस जमीन पर गणेश महाली दावा कर रहे हैं उस जमीन को साल 2018 में उन्होंने पॉल डॉक्टर के भतीजे सुशील लोहार और सुनील लोहार से खरीदा था. उक्त जमीन का होल्डिंग टैक्स और बिजली कनेक्शन भी उन्हीं के नाम पर था. जब उन्होंने जमीन खरीदी उसके बाद होल्डिंग नंबर और बिजली कनेक्शन अपने नाम से कराया जो आज भी वही चुका रहे हैं. यदि गणेश महाली की जमीन है तो उन्होंने आज तक होल्डिंग नंबर और बिजली कनेक्शन क्यों नहीं लिया. जहां तक कब्जा की बात है तो अभी भी वह जमीन उनके कब्जे में है. एक हफ्ता पूर्व उनके द्वारा जबरन कब्जा करने का प्रयास किया गया जो बिल्कुल गलत है. उन्होंने कहा कि 2020 में भी एकबार ब्लॉक के किसी अधिकारी द्वारा उस जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया गया था. इसको लेकर उन्होंने तत्कालीन उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी. उपायुक्त के निर्देश पर तत्कालीन अंचलाधिकारी ने जांच कर फैसला उनके पक्ष में दिया था. चूंकि जमीन अनाबाद बिहार सरकार की है इसलिए रिपोर्ट की कॉपी उन्हें नहीं दी गई थी. उसके बाद वह उस जमीन पर निर्माण कार्य कराकर आराम से रह रहे थे. इसी बीच 1 साल पूर्व गणेश महाली द्वारा इस तरह का प्रयास किया गया था. तब वे बीजेपी में थे और तत्कालीन थाना प्रभारी राजीव कुमार सिंह थे. उन्होंने जब दस्तवेज़ तलब किया तब तब कोई सामने नहीं आया. आज जब गणेश महाली झामुमो में हैं तो वे बाहुबल और पार्टी के बैनर का दुरुपयोग कर जबरन उस जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि अभी उक्त जमीन को उन्होंने विवेक उपाध्याय को बेच दिया है मगर होल्डिंग टैक्स और बिजली कनेक्शन उनके नाम पर ही है. वे हर तरह की जांच के लिए तैयार हैं और जहां भी जरूरत पड़ेगी विवेक के साथ खड़ा हूं. जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री के पास भी जाऊंगा और इंसाफ की गुहार लगाऊंगा. उन्होंने बताया कि महाली जी सक्षम थे कम से कम होल्डिंग नम्बर और बिजली कनेक्शन ही खुद के नाम से करा लेते.
अर्जुन सिंह वालिया
कुल मिलाकर इस प्रकरण ने साफ कर दिया है कि राजनीतिक सर परस्ती में गणेश महाली कहीं ना कहीं अपनी गलती से विपक्ष को मौका दे रहे हैं. चाहे भाजपा में रहे या झामुमो में. यदि वाकई में उक्त जमीन उनकी थी तो उन्होंने पार्टी का बैनर क्यों प्रयोग किया ? यदि पार्टी का बैनर या कार्यालय ही खोलना था तो जिस वक्त उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा ज्वाइन किया था तभी उसमें कार्यालय खोल सकते थे. उन्हें यह भी नहीं पता है कि उक्त जमीन का होल्डिंग टैक्स और बिजली कनेक्शन किसके नाम पर है. निर्णय पार्टी आलाकमान को लेना है क्योंकि महाली ने अपने बयान में इस मामले को विपक्ष का साजिश करार दिया है. वैसे न तो विवेक का कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि है न वालिया का. यदि वाकई विपक्ष इसे मुद्दा बना लिया तो पार्टी की छवि पर बट्टा लगना तय है. खासकर आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में तो इसका जबरदस्त प्रभाव पड़ेगा. अंत में एक सोशल मीडिया के हवाले से महाली ने कहा है कि वे भ्रामक खबर प्रकाशित करने वाले संस्थान के खिलाफ लीगल एक्शन लेंगे. महाली को बताना चाहिए कि किस मीडिया संस्थान ने उनके खिलाफ भ्रामक खबर प्रकाशित किया है. उनके इस बयान पर मीडियाकर्मियों में घोर नाराजगी है. उनका यह दांव कहीं भारी न पड़ जाए.

