आदित्यपुर: झारखंड निकाय चुनाव की सरगर्मियों के बीच आदित्यपुर नगर निगम वार्ड 29 में एक अलग ही माहौल देखने को मिल रहा है. यहां चुनावी चर्चा से ज्यादा दिवंगत पार्षद राजमणि देवी की यादें लोगों के मन को व्याकुल कर रही हैं. वार्ड की जनता को यह सोच ही भावुक कर रही है कि पिछले 15 वर्षों में पहली बार ऐसा मौका आएगा, जब वे अपने प्रिय पार्षद को वोट नहीं दे पाएंगे.

वार्ड 29 की गलियों, चौक- चौराहों और घरों में आज भी राजमणि देवी के कामों की चर्चा होती है. लोग कहते हैं कि उन्होंने सिर्फ एक जनप्रतिनिधि के तौर पर नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह हर सुख-दुख में साथ निभाया. सड़क, पानी, बिजली से लेकर गरीबों की मदद तक, हर मुद्दे पर उनकी मौजूदगी लोगों को आज भी याद आती है.
राजमणि देवी के निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि उनकी राजनीतिक विरासत को आगे कौन बढ़ाएगा. वार्ड में इस बात को लेकर लगातार चर्चा हो रही है कि क्या परिवार का कोई सदस्य चुनावी मैदान में उतरेगा. चूंकि यह सीट महिला के लिए आरक्षित है, ऐसे में दिवंगत पार्षद की दोनों बहुएं इस सीट से दावेदारी कर सकती हैं. हालांकि अब तक परिवार की ओर से किसी ने भी औपचारिक रूप से अपनी दावेदारी सामने नहीं रखी है. इससे वार्ड की जनता असमंजस में है और सभी की निगाहें परिवार के फैसले पर टिकी हुई हैं.
गौरतलब है कि राजमणि देवी ने अपने राजनीतिक सफर में एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया था. वे झारखंड में सबसे अधिक मतों से चुनाव जीतने वाली पार्षद बनी थीं. लगातार तीन बार निकाय चुनाव जीतकर उन्होंने जनता का अटूट भरोसा हासिल किया. दुर्भाग्यवश तीसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के कारण उनका निधन हो गया.
हालांकि राजमणि देवी अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन वार्ड 29 में उनकी कमी हर किसी को खल रही है. लोग कहते हैं कि चुनाव आएंगे और उम्मीदवार बदलेंगे, लेकिन राजमणि देवी जैसी पार्षद दोबारा मिलना आसान नहीं है. फिलहाल पूरे वार्ड की नजरें उनके परिवार के निर्णय पर टिकी हैं, क्योंकि जनता चाहती है कि उनकी सेवा और समर्पण की विरासत आगे भी जीवित रहे.

