आदित्यपुर: सत्ता और उसका पावर क्या होता है यदि जानना हो तो भाजपा छोड़ जेएमएम में शामिल हुए गणेश महाली से बेहतर कोई दूसरा उदाहरण नहीं हो सकता. यही कारण है कि दो- दो हार के बाद भी पाला बदलकर वे झारखंड मुक्ति मोर्चा से तीसरी बार सरायकेला विधानसभा से टिकट हासिल करने में सफल रहे ये अलग बात है कि उन्हें तीसरी बार भी हार का सामना करना पड़ा. महाली एक बार फिर से सुर्खियों में है. वैसे विगत 15 वर्षों से गणेश महाली समाज सेवक के रूप में जाने जाते थे. मगर हाल के दिनों में उनकी छवि जमीन माफिया के रूप में उभर कर सामने आ रही है जिससे आदित्यपुर के लोगों में नाराजगी उभरने लगी है.

दरअसल सरायकेला- खरसावां जिला के आदित्यपुर थाना अंतर्गत नेशनल इलेक्ट्रॉनिक के पीछे सालडीह रोड में एक जमीन को लेकर विवाद सामने आया है. जिसपर पुलिस एवं अंचल कार्यालय ने यथा स्थिति बनाए रखते हुए दोनों पक्षों को फैसला आने तक विवादित जमीन पर कब्जा करने अथवा कब्जा करने के प्रयास पर रोक लगाई है. मगर सत्ता के मद में चूर गणेश महाली ने नियम- कानून और पुलिस प्रशासन के आदेश को ताक पर रखते हुए अपने लोगों को विवादित जमीन में चोरी- छिपे प्रवेश करा दिया है. गुरुवार को इसकी भनक जब मीडिया को लगी तो विवादित जमीन में रह रहे दंपति ने खुलेआम गणेश महाली का नाम बताया और कहा कि उनके कहने पर ही वे यहां रह रहे हैं. वह मूल रूप से खरसावां के रहने वाले हैं. इससे ज्यादा और कुछ भी नहीं जानते. इधर अंचल अधिकारी से जब पूछा गया तो उन्होंने इसकी कोई जानकारी नहीं होने की बात कही. उन्होंने कहा कि यदि ऐसी बात है तो विधि- सम्मत कार्रवाई की जाएगी. अब सवाल यह उठता है कि आखिर किसके इशारे पर गणेश महाली ने नियम कानून को ताक पर रखकर यह कदम उठाया है. अंदरखाने की माने तो स्थानीय पुलिस की भूमिका कटघरे में है.
मालूम हो कि उक्त जमीन पर गणेश महाली और अर्जुन सिंह वालिया- विवेक उपाध्याय दावा कर रहे हैं. दोनों ने अपने-अपने स्तर से दस्तावेज अंचल कार्यालय और पुलिस को उपलब्ध कराए हैं. मामले की जांच चल रही है. अंचल अधिकारी ने यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है. पिछले दिनों गणेश महाली ने उक्त जमीन पर कब्जा करने के दौरान पार्टी का झंडा बैनर लगा दिया था. अर्जुन सिंह वालिया ने बताया कि महाली के द्वारा पूर्व में भी इस तरह का प्रयास किया गया था. जब वह बीजेपी में थे तब बीजेपी का झंडा लगाकर कब्जा करने का प्रयास किया था. अब झारखंड मुक्ति मोर्चा में शामिल होने के बाद झामुमो का झंडा- बैनर लगाकर उनकी जमीन हथियाना चाहते हैं. उन्होंने कम से इसकी शिकायत करने की बात कही. जबकि गणेश महली ने भी जमीन से संबंधित दस्तावेज पुलिस एवं अंचल प्रशासन को उपलब्ध कराए हैं और दावा किया है कि यह जमीन उनकी है. मामला चाहे जो भी हो मगर शासन- प्रशासन से ऊपर यदि एक जनप्रतिनिधि उठकर काम करेगा तो सवाल उठेंगे ही. गणेश महाली के इस कृत की न केवल पार्टी बल्कि समूचे विधानसभा में चर्चा हो रही है जो आगामी विधानसभा चुनाव में उनके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है.
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