आदित्यपुर: अगर सत्ता और पॉवर का दुरुपयोग देखना है, तो यह रिपोर्ट जरूर पढ़िए. यह कहानी है झामुमो नेता गणेश महाली की, जिन पर आरोप है कि उन्होंने सियासी प्रभाव का इस्तेमाल कर एक आम नागरिक की जमीन पर कब्जा कर लिया. मामला सरायकेला- खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र का है.

जुलाई 2025 में विवेक उपाध्याय नामक व्यक्ति ने झामुमो नेता गणेश महाली के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी. आरोप था कि गणेश महाली ने सालडीह बस्ती स्थित उसकी खरीदी हुई जमीन पर जबरन पार्टी का झंडा-बैनर लगाकर कब्जा कर लिया. विवेक ने बताया कि उसने यह जमीन अर्जुन सिंह वालिया से खरीदी थी, लेकिन झामुमो नेता ने उसे जबरन बेदखल कर मकान पर ताला जड़ दिया.
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों पक्षों से कागजात मांगे. अंचल कार्यालय ने जांच रिपोर्ट आने तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी किया. लेकिन चार महीने बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट सामने नहीं आई. इस बीच झामुमो नेता के निर्देश पर विवादित मकान में दो बार संदिग्ध लोगों को पकड़ा गया, जिन्होंने खुद स्वीकार किया कि वे गणेश महाली के कहने पर वहां रह रहे थे.
गणेश महाली ने दावा किया कि उन्होंने यह जमीन श्रीकांत कुंभकार से 2023 में खरीदी थी. वहीं श्रीकांत कुंभकार ने कहा कि वह जमीन उनके कब्जे में 2001 से 2022 तक रही और बीमारी के बाद 2023 में गणेश महाली को बेच दी. गणेश महाली ने मीडिया में यह भी कहा कि जमीन का होल्डिंग टैक्स और बिजली कनेक्शन उनके नाम पर है, लेकिन उन्होंने कोई दस्तावेज़ नहीं दिखाया.
देखिए गणेश महाली, श्रीकांत कुम्भकार और अर्जुन सिंह वालिया का हमारे वेबसाइट पर पूर्व में दिया बयान 👇
https://indianewsviral.co.in/adityapur-land-controversy/
वहीं, अर्जुन सिंह वालिया ने इस दावे को झूठा बताया. उन्होंने कहा कि उन्होंने यह जमीन 2018 में सुशील लोहार और सुनील लोहार से खरीदी थी. जमीन का होल्डिंग टैक्स और बिजली कनेक्शन उनके नाम पर है और वे अब तक उसका भुगतान कर रहे हैं
अब बड़ा सवाल यह है कि जब जमीन का बिजली कनेक्शन 2020 से अर्जुन सिंह वालिया के नाम था, तो अचानक अक्टूबर 2025 में बिना सूचना के यह कनेक्शन काट क्यों दिया गया. और उसी पते पर 19 अगस्त 2025 को श्रीकांत कुमार नाम से नया कनेक्शन कैसे जारी कर दिया गया. हमारी पड़ताल में पाया गया कि श्रीकांत कुमार ने जो आधार कार्ड जमा किया उसमें हस्ताक्षर “श्रीकांत कुंभकार” लिखा है. यानी दोनों व्यक्ति एक ही हैं.
ये विभाग द्वारा अर्जुन सिंह वालिया का काटा गया कनेक्शन और वालिया द्वारा हालिया जमा किया गया बिल 👇
नीचे वो दस्तावेज हैं जिस आधार पर श्रीकांत कुम्भकार उर्फ़ श्रीकांत कुमार को नया मीटर कनेक्शन दिया गया है 👇




इससे यह साफ होता है कि सत्ता के दबाव में विभाग ने फर्जी तरीके से बिजली कनेक्शन जारी किया. सवाल यह भी है कि ऊपर से आदेश किसने दिया और किसके प्रभाव में विभाग ने नियमों को ताक पर रख दिया.
लोगों को गुमराह करने के लिए विभाग ने जो मीटर लगाया है उसपर शिवकांत कुमार लिखा गया है जो विभाग के फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार का प्रमाण है देखिए 👇

अबुआ राज में अगर यही प्रशासनिक पारदर्शिता है तो गरीबों को न्याय की उम्मीद करना बेमानी है. यह पूरा मामला सत्ता, सियासत और सिस्टम की सांठगांठ का जीता-जागता उदाहरण है.

