आदित्यपुर: नगर निगम में डिप्टी मेयर के चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. करीब आधा दर्जन पार्षद इस पद की दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं और सभी अपनी- अपनी जीत के दावे कर रहे हैं. वहीं राजनीतिक दल भी अपने- अपने समीकरण बैठाने में जुट गए हैं.

दरअसल आदित्यपुर नगर परिषद से लेकर नगर निगम बनने तक के इतिहास पर नजर डालें तो एक दिलचस्प परंपरा सामने आती है. यहां अब तक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मेयर और डिप्टी मेयर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर बैठे जनप्रतिनिधि दोबारा चुनाव जीतने में सफल नहीं हो सके हैं. कई तो अगली बार पार्षद बनने से भी चूक गए.
मिसाल के तौर पर नगर परिषद की पहली अध्यक्ष रीता श्रीवास्तव दुबारा चुनाव नहीं जीत सकीं और पार्षद भी नहीं बन पाईं. उनके बाद अध्यक्ष बनी राधा सांडिल को भी अगली बार जनता ने नकार दिया, जिसके बाद उनका राजनीतिक करियर लगभग समाप्त हो गया.
नगर निगम बनने के बाद पहले मेयर के रूप में भाजपा के विनोद कुमार श्रीवास्तव चुने गए थे. लेकिन इस बार रोस्टर प्रणाली के तहत मेयर का पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हो जाने के कारण वे चुनावी दौड़ में शामिल नहीं हो सके. इस बार भाजपा समर्थित प्रत्याशी संजय सरदार मेयर बने हैं.
अगर उपाध्यक्ष और डिप्टी मेयर की बात करें तो पहले उपाध्यक्ष के रूप में पुरेन्द्र नारायण सिंह चुने गए थे. अगली बार वे पार्षद तो बने, लेकिन उपाध्यक्ष पद पर वापसी नहीं कर सके. वहीं नगर निगम बनने के बाद अमित सिंह उर्फ बॉबी सिंह भाजपा के टिकट पर डिप्टी मेयर चुने गए थे, लेकिन इस बार वे पार्षद का चुनाव भी नहीं जीत सके और पूरी तरह रेस से बाहर हो गए.
ऐसे में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है कि डिप्टी मेयर पद के लिए जोर आजमाइश कर रहे पार्षद क्या इस परंपरा को तोड़ पाएंगे या फिर आदित्यपुर की राजनीति में इतिहास एक बार फिर खुद को दोहराएगा.

