आदित्यपुर: बीते 11 नवंबर को छठ घाट से लौट रहे स्क्रैप कारोबारी विक्की नंदी पर बम और गोलियों से हमला किया गया था. जिसमें विक्की नंदी और उसका परिवार बाल- बाल बच गया था. हमले में विक्की के साथ एक महिला और एक युवती को हल्की चोटें आई थी. वैसे तो आदित्यपुर थाना पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए घटना से जुड़े छः अपराधकर्मियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है, मगर जिन अपराधियों को पुलिस ने सलाखों के पीछे भेजा है उनमें सबसे शातिर भट्टा लोहार है, जो कई आपराधिक मामलों का आरोपी रहा है वैसे तो भट्टा कुख्यात अपराधकर्मी कृष्णा गोप गिरोह के लिए काम करता है, मगर इस घटना में अपराधकर्मी सागर लोहार गिरोह के सदस्यों बबलू दास और मोती लाल बिसोई के साथ गिरफ्त में आए भट्टा लोहार और राजू हेसा की भूमिका को लेकर कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहा है. सूत्रों की अगर मानें तो कृष्णा गोप और सागर लोहार गैंग ने आपस में सुलह कर लिया है, और कृष्णा गोप से अलग हटकर विक्की नंदी के मनोज सरकार गिरोह में चले जाने के कारण उक्त घटना को अंजाम दिया गया था. विदित रहे कि विजय नंदी पूर्व में कृष्णा गोप का करीबी था. कृष्णा के जेल जाने के बाद विक्की नंदी ने अपराध कर्मी मनोज सरकार से हाथ मिला लिया और स्क्रैप के व्यवसाय में कूद पड़ा. जहां उसे अच्छी खासी आमदनी होने लगी, और वह थोड़े ही समय में बड़े रसूखवाला बन गया, जो कहीं ना कहीं जेल में बंद कृष्णा को खटकने लगा. हालांकि आदित्यपुर थाना प्रभारी ने मामले में कृष्णा गोप की भूमिका से इंकार किया है. इसका मतलब साफ है कि अपराध कर्मी सागर लोहार के करीबी रहे बबलू दास ने सुनियोजित तरीके से दोनों गैंग के सदस्यों को एकजुट कर उक्त घटना को अंजाम दिलाया है. हालांकि पुलिस ने इस राज से पर्दा नहीं उठाया. उक्त मामले में पुलिस की गिरफ्त में आए अन्य अपराध कर्मी आकाश कोतवाल और राजू वर्मा नए चेहरे हैं. हालांकि छोटी- मोटी चोरी की घटनाओं में दोनों पूर्व में भी जेल जा चुके हैं, और हाल ही में इस नए गैंग के सदस्य बने हैं. वैसे नए गिरोह के कारनामे से विक्की तो बाल- बाल जरूर बच गया, मगर क्या विक्की कोर्ट में गवाही के दौरान उक्त अपराधकर्मियों के खिलाफ मुंह खोलेगा ! इसका मतलब साफ है कि सभी अपराधी दो- चार महीनों में बाहर होंगे और फिर नया गिरोह क्षेत्र के लिए मुसीबत बन जायेगा.

