सरायकेला: सरायकेला में बदहाल सड़कों और जानलेवा गड्ढों का खामियाजा आखिर कब तक लोग अपनी जान देकर चुकाते रहेंगे. सड़क सुरक्षा के दावों के बीच सरायकेला-राजनगर बाईपास के पास एक दर्दनाक सड़क हादसे में स्कूटी सवार सागर हेंब्रम की मौत हो गई. मिली जानकारी के अनुसार, टर्निंग के पास स्कूटी पीछे से एक ट्रेलर से टकरा गई, जिससे सागर ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया. जिस रास्ते पर सड़क की बदहाली और बड़े-बड़े गड्ढों को लेकर पहले भी शिकायतें किए जाने की बात सामने आ रही है, उसी जगह हुई इस घटना ने प्रशासन और यातायात व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है.


मिली जानकारी के अनुसार, सागर हेंब्रम सेंट फ्रांसिस स्कूल में आयोजित डांडिया कार्यक्रम में शामिल होने के लिए स्कूटी से जा रहा था. इसी दौरान सरायकेला-राजनगर बाईपास के पास टर्निंग पर उसकी स्कूटी आगे चल रहे ट्रेलर के पिछले हिस्से से टकरा गई. टक्कर इतनी गंभीर थी कि सागर की घटनास्थल पर ही मौत हो गई. बताया जा रहा है कि सागर झारखंड पुलिस में कार्यरत एक महिला जवान का बेटा था. हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है.
जिस घर में कार्यक्रम को लेकर उत्साह रहा होगा, वहां इस हादसे की खबर ने मातम पसार दिया। एक सड़क दुर्घटना ने परिवार की खुशियों को पलभर में उजाड़ दिया.
घटना की सूचना मिलते ही सरायकेला थाना प्रभारी विनय कुमार पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सरायकेला सदर अस्पताल भेज दिया. वहीं, दुर्घटना में शामिल ट्रेलर को जब्त कर अपने कब्जे में ले लिया. पुलिस मामले की जांच में जुटी है। हादसे के वास्तविक कारणों का पता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.
इस हादसे के बाद सबसे गंभीर सवाल सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर उठ रहा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस टर्निंग के पास दुर्घटना हुई, वहां सड़क पर एक बड़ा गड्ढा है. इस गड्ढे की मरम्मत के लिए संबंधित अधिकारियों को कई बार लिखित आवेदन दिए जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया.
लोगों का कहना है कि यदि सड़क की समय रहते मरम्मत कराई जाती, तो दुर्घटना की आशंका को कम किया जा सकता था. हालांकि, हादसे में गड्ढे की प्रत्यक्ष भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। इसके बावजूद सड़क की स्थिति और पहले की गई शिकायतों की जांच करना बेहद जरूरी है.
सड़क दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा यातायात पुलिस की कार्यशैली पर भी फूट पड़ा है. लोगों का आरोप है कि यातायात पुलिस दोपहिया वाहनों का चालान काटने में सक्रिय नजर आती है, लेकिन सड़क पर मौजूद जानलेवा गड्ढों, खतरनाक मोड़ों और दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित बनाने के मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं दिखती.
सवाल यह है कि क्या सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल हेलमेट जांच और चालान काटने तक सीमित है. क्या दुर्घटना संभावित स्थानों का निरीक्षण करना, संबंधित विभाग को मरम्मत के लिए लिखना और खतरनाक मोड़ों पर चेतावनी संकेत लगवाना व्यवस्था की जिम्मेदारी नहीं है.
नियमों का पालन कराना जरूरी है, लेकिन नागरिकों की जान बचाने के लिए सुरक्षित सड़कें सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है. यदि किसी स्थान पर बार-बार खतरे की शिकायत मिल रही है, तो दुर्घटना होने से पहले कार्रवाई क्यों नहीं की जाती.
सरायकेला में सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर लोगों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं. कई मार्गों पर बने बड़े-बड़े गड्ढे वाहन चालकों के लिए परेशानी और दुर्घटना का खतरा पैदा करते हैं. कहीं सड़क की सतह उखड़ी हुई है, तो कहीं मोड़ पर गड्ढों के कारण वाहन संभालना मुश्किल हो जाता है। विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए ऐसी सड़कें अधिक जोखिमपूर्ण साबित हो सकती हैं.
सड़क पर गड्ढे होने से वाहन चालक अचानक दिशा बदलने या ब्रेक लगाने को मजबूर हो सकते हैं. यदि इसी दौरान पीछे या बगल से भारी वाहन गुजर रहा हो, तो दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है. सरायकेला-राजनगर बाईपास के पास हुआ यह हादसा सड़क की स्थिति और दुर्घटना संभावित स्थानों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की जरूरत रेखांकित करता है.
सागर हेंब्रम की मौत ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों की मांग है कि दुर्घटनास्थल की सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए, खतरनाक टर्निंग पर पर्याप्त चेतावनी संकेत लगाए जाएं और पहले दिए गए लिखित आवेदनों की जांच की जाए। साथ ही, जिले की अन्य जर्जर सड़कों और बड़े गड्ढों की पहचान कर समयबद्ध मरम्मत सुनिश्चित की जाए.
सड़क पर गड्ढा दिखने के बाद भी यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो हादसे के बाद केवल अफसोस जताने से क्या हासिल होगा. सड़क सुरक्षा का असली अर्थ सिर्फ यातायात नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना भी है, जिसमें कोई व्यक्ति घर से निकले तो सुरक्षित वापस लौट सके.
सागर की मौत के बाद अब देखना यह है कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस घटना से सबक लेकर सड़क को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाते हैं या फिर शिकायतें, आश्वासन और गड्ढों का सिलसिला यूं ही चलता रहेगा.

