जामताड़ा: सरकारी स्कूल में पढ़ाई कर रहा एक छात्र, सीमित संसाधनों के बीच वैज्ञानिक सोच को आकार देता है और उसका बनाया मॉडल जिला व राज्य स्तर की बाधाएं पार करते हुए राष्ट्रीय प्रतियोगिता तक पहुंच जाता है. जामताड़ा के जेबीसी प्लस टू मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय के कक्षा 12 विज्ञान संकाय के छात्र प्रेमजीत दास की कहानी सरकारी विद्यालयों में बदलते शैक्षणिक माहौल और बढ़ते नवाचार की ऐसी ही तस्वीर पेश करती है.


प्रेमजीत ने विद्यालय के प्राचार्य एबी माइल टुडू और शिक्षक मो. ओजैर आलम के मार्गदर्शन में ऑटोमोबाइल से निकलने वाले धुएं में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) की मात्रा कम करने की अवधारणा पर आधारित एक मॉडल तैयार किया है. छात्र ने अपने प्रोजेक्ट का नाम ‘कार्बन कंटेनर कम रिड्यूसर फॉर ऑटोमोबाइल’ रखा है. विज्ञान और तकनीक पर आधारित इस मॉडल में गैस के प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग पाइप लगाए गए हैं.
साइलेंसर के धुएं को कंटेनर में ले जाने की परिकल्पना
प्रेमजीत के मॉडल की परिकल्पना के अनुसार वाहन चलने के दौरान साइलेंसर से निकलने वाला धुआं गैस इनलेट पाइप के माध्यम से कंटेनर के अंदर पहुंचेगा. कंटेनर में निर्धारित प्रक्रिया के बाद गैस में मौजूद CO₂ की मात्रा को कम करने का प्रयास किया जाएगा. इसके बाद गैस गैस आउटलेट पाइप से बाहर निकलेगी. इस मॉडल के जरिए छात्र ने वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण की समस्या को तकनीकी समाधान से जोड़ने का प्रयास किया है. प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि इसमें कक्षा में पढ़े गए विज्ञान को एक वास्तविक समस्या से जोड़कर मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया है.
जिला स्तर पर सर्वश्रेष्ठ, राज्य के बाद राष्ट्रीय मंच पर चयन
प्रेमजीत के इस प्रोजेक्ट को इंस्पायर अवार्ड के तहत जिला स्तर पर अधिकारियों द्वारा ऑनलाइन समीक्षा में सर्वश्रेष्ठ प्रोजेक्ट के रूप में चयनित किया गया. इसके बाद राज्य स्तर की प्रतिस्पर्धा में भी प्रोजेक्ट ने अपनी जगह बनाई. अब इसे 12वीं राष्ट्रीय प्रदर्शनी सह प्रोजेक्ट प्रतियोगिता के लिए राष्ट्रीय स्तर पर चयनित किया गया है. राष्ट्रीय स्तर पर यदि प्रोजेक्ट अपनी वैज्ञानिक अवधारणा और उपयोगिता से निर्णायकों को प्रभावित करने में सफल रहता है, तो आगे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जापान भेजे जाने का अवसर भी मिल सकता है.
‘ महंगे स्कूल ही सफलता की गारंटी’ की सोच को चुनौती
प्रेमजीत की उपलब्धि उन अभिभावकों के लिए भी एक संदेश है, जो अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए महंगे निजी स्कूलों को ही सफलता का रास्ता मानते हैं. यह उपलब्धि बताती है कि प्रतिभा किसी स्कूल की फीस की मोहताज नहीं होती. उसे जरूरत होती है अवसर, प्रयोग की स्वतंत्रता और सही मार्गदर्शन की. जेबीसी प्लस टू मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय में प्रेमजीत को मिले प्रोत्साहन ने इसी सोच को मजबूती दी है. प्राचार्य और शिक्षक के मार्गदर्शन में छात्र ने सिर्फ किताबों तक सीमित रहने के बजाय अपनी वैज्ञानिक कल्पना को मॉडल का रूप दिया और उसे प्रतियोगिता के राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया.
बदल रहा सरकारी विद्यालयों का माहौल
प्रेमजीत की सफलता को विद्यालय के बदलते शैक्षणिक वातावरण से भी जोड़कर देखा जा रहा है. सरकारी स्कूल अब केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं हैं. उत्कृष्ट विद्यालयों में विद्यार्थियों को विज्ञान, तकनीक, प्रयोग, नवाचार और प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है. प्राचार्य एबी माइल टुडू और शिक्षक मो. ओजैर आलम के मार्गदर्शन में प्रेमजीत की यह उपलब्धि इसी बदलाव की तस्वीर पेश करती है. एक ओर छात्र ने अपनी प्रतिभा दिखाई, तो दूसरी ओर विद्यालय ने उसे मंच देने का काम किया.
राष्ट्रीय मंच तक पहुंचना ही बड़ी उपलब्धि
जामताड़ा जैसे जिले से सरकारी विद्यालय के छात्र का वैज्ञानिक प्रोजेक्ट जिला स्तर से राज्य और फिर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है. अब प्रेमजीत की नजर राष्ट्रीय प्रतियोगिता पर है. यदि उसका ‘कार्बन कंटेनर’ राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी छाप छोड़ता है, तो जामताड़ा के इस सरकारी विद्यालय के छात्र के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच की राह खुल सकती है.
प्रेमजीत की कहानी यही बताती है- संसाधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन प्रतिभा और सही मार्गदर्शन मिल जाए तो सरकारी स्कूल की कक्षा से भी राष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानक उड़ान भरी जा सकती है.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

