जामताड़ा: झारखंड सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए अबुआ आवास योजना चला रही है. योजना के माध्यम से जरूरतमंदों को आवास देने के दावे भी किए जा रहे हैं लेकिन नाला प्रखंड की पांजूनिया पंचायत के बेनागड़िया गांव की तस्वीर सरकारी दावों और जमीन की हकीकत के बीच का अंतर सामने ला रही है. यहां विजय राउत का परिवार आज भी जर्जर मकान में रहने को मजबूर है. बारिश शुरू होते ही घर की हालत और भयावह हो जाती है. जमीन के भीतर से पानी रिसकर घर में जमा हो जाता है और परिवार को खुद पानी निकालने की जद्दोजहद करनी पड़ती है.


तीन बेटियों के साथ जर्जर घर में गुजर रही जिंदगी
विजय राउत का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर बताया जाता है. परिवार में तीन बेटियां हैं और स्थायी आमदनी का कोई भरोसेमंद साधन नहीं है. ऐसे में परिवार के लिए सिर पर पक्की छत होना महज सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा की जरूरत है. लेकिन वर्षों से परिवार जर्जर मकान में रहने को विवश है.
बारिश के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है. घर की जमीन से पानी का रिसाव होने के कारण परिवार के सदस्यों को रात-दिन पानी निकालना पड़ता है. जर्जर मकान के बीच बच्चों और परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है.
ग्रामसभा ने भेजा प्रस्ताव, फिर भी नहीं आया नाम
मामले में पांजूनिया पंचायत की मुखिया से जानकारी ली गयी तो उन्होंने बताया कि ग्रामसभा के माध्यम से विजय राउत के परिवार का नाम अबुआ आवास के लिए प्रस्तावित कर प्रखंड कार्यालय भेजा गया था. इसके बावजूद अबुआ आवास की सूची में परिवार का नाम नहीं आया.
वहीं, जानकारी यह भी सामने आयी है कि परिवार का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में दर्ज है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि परिवार आवास की जरूरत और पात्रता की श्रेणी में आता है, तो अब तक उसे पक्का मकान क्यों नहीं मिल सका?
कागज पर पात्रता, जमीन पर जर्जर मकान
यह मामला सिर्फ एक परिवार की परेशानी तक सीमित नहीं है. यह सरकारी आवास योजनाओं के क्रियान्वयन और लाभुकों के चयन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़ा करता है.आखिर ग्रामसभा से नाम प्रस्तावित होने के बाद भी परिवार अबुआ आवास की सूची से बाहर कैसे रह गया? यदि प्रधानमंत्री आवास की सूची में नाम है तो आवास का लाभ कब और क्यों नहीं मिला? क्या संबंधित स्तर पर लाभुकों की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन हुआ?
इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग को देना होगा.
प्रशासन करे स्थल जांच, परिवार को मिले उसका हक
ग्रामीणों और परिजनों की मांग है कि प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर विजय राउत के परिवार की वास्तविक स्थिति का जायजा लें. आवास योजना के निर्धारित मानकों के अनुसार पात्रता की जांच कर परिवार को नियमानुसार आवास का लाभ दिया जाए. बारिश में जिस घर की जमीन से पानी रिस रहा हो, वहां रहने वाले परिवार के लिए पक्की छत किसी सरकारी योजना का आंकड़ा नहीं, बल्कि जिंदगी और सुरक्षा का सवाल है. अब देखना यह है कि प्रशासन इस तस्वीर को सिर्फ एक शिकायत मानकर छोड़ देता है या मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करता है। क्या विजय राउत के परिवार को अगली बरसात से पहले पक्की छत मिलेगी, या फिर एक और बरसात इसी जर्जर मकान में गुजर जाएगी?
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

