सरायकेला: टाटा- कांड्रा मुख्य सड़क पर लगातार हो रहे हादसों के बीच सड़क किनारे बढ़ता अतिक्रमण और बेतरतीब पार्किंग अब गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है. कहीं भारी वाहन सड़क किनारे खड़े हैं तो कहीं व्यावसायिक गतिविधियां धीरे-धीरे सड़क और फुटपाथ की जगह घेर रही हैं. इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से समन्वित और स्थायी कार्रवाई नजर नहीं आ रही. सवाल यह है कि क्या व्यवस्था किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगी ?


इस समस्या के लिए किसी एक विभाग को जिम्मेदार ठहराकर बाकी एजेंसियां अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकतीं. यातायात व्यवस्था पुलिस से जुड़ी है, सड़क और उसके किनारों की सुरक्षा संबंधित सड़क प्रबंधन एजेंसी की जिम्मेदारी है, जबकि अतिक्रमण और व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निकाय तथा संबंधित भू-स्वामी विभागों की भी भूमिका बनती है.
सड़क किनारे बन रहा नया ‘फूड जोन’, रात तक लग रही भीड़
सबसे ज्यादा चिंता जियाडा और स्वर्णरेखा परियोजना की बाउंड्री से सटे हिस्सों को लेकर सामने आ रही है. यहां हाल के दिनों में फुटपाथ पर खाने-पीने के ठेले और दुकानें बढ़ती दिखाई दे रही हैं. रात करीब 11 बजे तक फास्ट फूड खाने वालों की भीड़ और उनके वाहनों की पार्किंग से सड़क किनारे गतिविधियां बढ़ रही हैं.

यहां मूल सवाल दुकानदारों की रोजी-रोटी का विरोध नहीं, बल्कि स्थान और सुरक्षा का है. यदि कोई इलाका वेंडिंग के लिए उपयुक्त है तो उसे व्यवस्थित वेंडिंग जोन के रूप में चिह्नित किया जाए. पार्किंग, रोशनी, पैदल आवाजाही और सड़क से सुरक्षित दूरी की व्यवस्था हो. लेकिन सड़क किनारे जहां जगह मिली वहीं दुकान, उसके सामने ग्राहकों के वाहन और फिर मुख्य सड़क से उनका अचानक निकलना हादसे का जोखिम बढ़ा सकता है.
दुर्घटना के बाद अतिक्रमण हटाना समाधान नहीं
टाटा- कांड्रा रोड जैसे व्यस्त मार्ग पर सड़क किनारे खड़े भारी वाहन चालक की दृश्यता बाधित कर सकते हैं. दुकानों और वाहनों के बीच से अचानक पैदल व्यक्ति या दोपहिया वाहन मुख्य सड़क पर आने की स्थिति भी खतरनाक हो सकती है. रात में यह जोखिम और बढ़ जाता है. यही वजह है कि प्रशासन को किसी गंभीर दुर्घटना के बाद अभियान चलाने के बजाय हादसा होने से पहले खतरे की पहचान करनी चाहिए. अतिक्रमण वर्षों तक बढ़ने देना और फिर अचानक बुलडोजर लेकर पहुंचना न तो स्थायी समाधान है और न ही बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था.
पहले सर्वे, फिर नोटिस और निर्धारित पार्किंग- वेंडिंग जोन
जिला प्रशासन को पुलिस, यातायात पुलिस, नगर निगम, जियाडा, स्वर्णरेखा परियोजना और संबंधित सड़क प्रबंधन एजेंसी की संयुक्त टीम बनाकर पूरे टाटा- कांड्रा मार्ग का रोड सेफ्टी एवं अतिक्रमण सर्वे कराना चाहिए. कहां अवैध पार्किंग है, कहां सड़क की दृश्यता बाधित हो रही है, कहां फुटपाथ या सड़क किनारे व्यावसायिक कब्जा बढ़ रहा है और किन स्थानों पर बार- बार दुर्घटनाएं हो रही हैं, इसे चिह्नित किया जाना चाहिए.

इसके बाद नियमों के अनुसार नोटिस और कार्रवाई हो. भारी वाहनों के लिए निर्धारित पार्किंग स्थल, फुटपाथी दुकानदारों के लिए सुरक्षित वेंडिंग जोन और प्रमुख स्थानों पर नो-पार्किंग संकेत तथा नियमित पेट्रोलिंग की व्यवस्था हो. कार्रवाई केवल दोपहिया वाहनों के चालान तक सीमित न रहकर सड़क पर वास्तविक दुर्घटना जोखिम पैदा करने वाली परिस्थितियों पर केंद्रित होनी चाहिए. टाटा- कांड्रा सड़क पर सवाल केवल अतिक्रमण का नहीं, जवाबदेही का भी है. यदि अलग- अलग विभाग अपनी सीमा बताकर जिम्मेदारी दूसरे पर डालते रहे तो सड़क किनारे कब्जा बढ़ता जाएगा. जरूरत अभी कार्रवाई की है, क्योंकि किसी हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करने से बेहतर है हादसा होने की वजह को पहले ही खत्म कर दिया जाए.

