जामताड़ा: लगातार तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के बीच नाला प्रखंड के बेनागड़िया गांव में एक गरीब परिवार का मिट्टी का मकान अचानक भरभराकर ढह गया. हादसे के समय राजेश मंडल के परिवार के सदस्य और बच्चे घर के अंदर मौजूद थे. गनीमत रही कि मकान गिरने से पहले सभी किसी तरह बाहर निकल गए, जिससे बड़ा हादसा टल गया. घटना के बाद परिवार के सामने सिर छिपाने का संकट खड़ा हो गया है. फिलहाल परिवार दूसरे के घर में रहने को मजबूर है.


मकान ढहने की घटना के बाद ग्रामीणों ने अबुआ आवास और प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए आवास योजनाएं चला रही है, लेकिन जर्जर मिट्टी के मकान में रहने वाला परिवार अब तक आवास सुविधा से वंचित है. ग्रामीणों ने पंचायत स्तर पर जरूरतमंद परिवारों के सर्वे और पात्र लाभुकों की पहचान की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया है.
बारिश ने खोल दी व्यवस्था की पोल
ग्रामीणों के अनुसार लगातार बारिश के कारण मिट्टी का मकान पहले से ही कमजोर हो गया था. शुक्रवार शाम अचानक मकान का एक हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा और देखते ही देखते पूरा आशियाना धराशायी हो गया. परिवार के लोग समय रहते बाहर निकल गए, जिससे उनकी जान बच गई. हालांकि मकान में रखा घरेलू सामान क्षतिग्रस्त होने से परिवार को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है.
तत्काल राहत और आवास की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने पंचायत प्रतिनिधियों और प्रखंड प्रशासन से पीड़ित परिवार की स्थिति का तत्काल जायजा लेने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को मामले की जांच कर परिवार को तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध करानी चाहिए. साथ ही यदि परिवार आवास योजना की पात्रता रखता है, तो अबुआ आवास या प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए.
ग्रामीणों ने कहा कि बारिश के मौसम में जर्जर मकानों में रहने वाले परिवारों की समय रहते पहचान और मदद जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके.
रिपोर्ट: मनीष वर्णवाल

