जामताड़ा: पीएम श्री राजकीय उत्क्रमित उच्च विद्यालय, शहरडाल में शनिवार को मृदा स्वास्थ्य मिशन के तहत एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. मृदा स्वास्थ्य के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने और उन्हें मिट्टी की गुणवत्ता जांचने की वैज्ञानिक प्रक्रिया से अवगत कराने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम में करीब 70 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया.


प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को मृदा नमूना संग्रह, मृदा परीक्षण और मृदा स्वास्थ्य कार्ड से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं. विद्यार्थियों को बताया गया कि मिट्टी फसल उत्पादन का आधार है. मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा, उर्वरता और अन्य आवश्यक गुणों की वैज्ञानिक जांच बेहतर कृषि उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है. मृदा परीक्षण के माध्यम से खेत में पोषक तत्वों की कमी की जानकारी प्राप्त की जा सकती है, जिसके आधार पर किसानों को आवश्यकता के अनुसार खाद और उर्वरकों के इस्तेमाल में मदद मिलती है.
सही नमूना संग्रह से ही सटीक जांच
प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को खेत से मिट्टी का सही तरीके से नमूना लेने की प्रक्रिया समझाई गई. बताया गया कि गलत तरीके से लिया गया नमूना मृदा परीक्षण के परिणाम को प्रभावित कर सकता है. इसलिए निर्धारित विधि के अनुसार अलग-अलग स्थानों से मिट्टी का नमूना लेकर उसे परीक्षण के लिए तैयार करना जरूरी है. विद्यार्थियों को मृदा परीक्षण की प्रक्रिया और रिपोर्ट के आधार पर मृदा स्वास्थ्य कार्ड तैयार करने की जानकारी भी दी गई.
मिट्टी की जांच से घटेगा अनावश्यक उर्वरक का इस्तेमाल
प्रशिक्षकों ने बताया कि बिना मिट्टी की जांच कराए लगातार रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल करने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो सकती है. मृदा परीक्षण के बाद प्राप्त जानकारी के आधार पर संतुलित मात्रा में पोषक तत्वों का उपयोग करने से मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सकता है. मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों के लिए खेत की मिट्टी की स्थिति समझने और उचित पोषक प्रबंधन में उपयोगी दस्तावेज है.
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने मृदा स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे. प्रशिक्षकों ने उनके सवालों का जवाब देते हुए मिट्टी संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और वैज्ञानिक कृषि पद्धति अपनाने के महत्व को समझाया.
कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य सुजीत कुमार मेहता, उप परियोजना निदेशक आत्मा संजय कुमार सिंह, कार्यक्रम सहायक रमन श्रीवास्तव, कृषि विज्ञान केंद्र जामताड़ा के प्रतिनिधि तथा प्रखंड तकनीकी प्रबंधक मो. इकबाल हुसैन समेत अन्य कर्मी मौजूद थे. विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को कृषि और पर्यावरण से जुड़े विषयों की व्यावहारिक जानकारी मिलती है. विद्यार्थी अपने परिवार और आसपास के किसानों को भी मृदा परीक्षण तथा संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक कर सकते हैं.
रिपोर्ट: मनीष वर्णवाल

