जमशेदपुर ब्यूरो रिपोर्ट: पूर्वी सिंहभूम जिले में महिला अधिकारों के रक्षण का तंत्र असफल नजर आ रहा है क्योंकि न्यायालय के आदेश पर अकुशल और अज्ञानी लोग घरेलू हिंसा की जांच कर रहे है. घरेलू हिंसा के जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ती की जा रही है. घरेलू हिंसा के जांच करने वाले महिला पर्यवेक्षिका को एक ही विभाग में रहते हुए यह तक नहीं मालूम है कि महिला अधिकारों के संरक्षण करने और आवश्यक कार्रवाई करने वाले प्रोटेक्शन पदाधिकारी कौन होते है.

लगभग चार साल पुराना ऐसा ही मामला प्रकाश में आ रहा है, जिसकी सुनवाई जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय में अभी भी जारी है. इस मामले में उस समय में कार्यरत बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, जमशेदपुर सदर, पूर्वी सिंहभूम, जमशेदपुर की महिला पर्यवेक्षिका नेहा कुमारी का बयान न्यायालय में कलमबद्ध किया जा रहा था. जिसमें महिला पर्यवेक्षिका नेहा कुमारी ने कहा कि “महिला प्रोटेक्शन पदाधिकारी कौन होते है मुझे जानकारी नहीं है“, “यह जांच करने का कार्य मुझे सीडीपीओ द्वारा दी जाती थी“. आगे दिए गए बयानों में इन्होंने यह भी स्वीकार किया है, कि “ जांच प्रतिवेदन माननीय न्यायालय के समक्ष जमा किया गया था, जिसमें कुछ गलत अंकित हो गया था‘‘. नेहा कुमारी के बयान से यह साबित हो जाता है कि घरेलू हिंसा के जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है, जिसका खामियाजा पीड़िता एवं न्याय व्यवस्था को पूरी तरह से भुगतना पड़ रहा है. इन अकुशल और अज्ञानी लोगों के जांच के कारण घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं सहित पूरे भारतीय समाज में न्यायालय की छवि भी धूमिल होगी.
पूर्वी सिंहभूम जिले के प्रोटेक्शन पदाधिकारी एवं महिला पर्यवेक्षिका द्वारा किया गया यह कार्य पूर्णतः गुणवत्ता विहीन है, जिसके कारण न्यायालयों में न्याय प्रक्रिया को पूरी तरह से भ्रमित करेगी. अकुशल और अज्ञानी लोगों द्वारा इस प्रकार की जांच प्रत्यक्ष रूप से दोषियों को अपराध से बरी करेगी. साथ ही पीड़ितों को न्याय मिलना लगभग नामुमकिन होगा. महत्वपूर्ण बात यह है कि कभी भी प्रोटेक्शन पदाधिकारी या महिला पर्यवेक्षिकाओं द्वारा इस प्रकार के जांच के लिए जिला से मार्ग दर्शन नहीं मांगा गया और न ही किसी कानूनविदों की मांग की गयी है. केंद्र सरकार, राज्य सरकार, महिला आयोग एवं मानव अधिकार आयोग को संज्ञान लेकर पूर्व में एवं वर्तमान के सभी जांच पर संज्ञान लेने की आवश्यकता है. साथ ही इन अकुशल एवं अज्ञानी लोगों पर भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है. महिला अधिकारों के रक्षण के लिए इस महत्वपूर्ण तंत्र को और सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है.
महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग, झारखण्ड सरकार के अधिसूचना अनुसार महिला पर्यवेक्षिका के चयन के लिए शैक्षणिक योग्यता अनुसार
कुल स्वीकृत पद के 75 % पद पर नियुक्ति हेतु किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से समाज शास्त्र या मनोविज्ञान या गृह विज्ञान विषयों के साथ महिला स्नातक जरूरी है. उक्त अनिवार्य योग्यता के अतिरिक्त अभ्यर्थियों को मैट्रिक/ 10 वी कक्षा एवं इंटरमीडिएट/ 10 वी कक्षा झारखण्ड राज्य में अवस्थित मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान से होना अनिवार्य होगा तथा अभ्यर्थियों को स्थानीय रीति- रिवाज, भाषा एवं परिदेश का ज्ञान होना अनिवार्य होगा.
महिला पर्यवेक्षिका के पद पर शैक्षणिक योग्यता की अहर्ता में कहीं भी कानून से संबंधित डिग्री या कानून से संबंधित कोई अन्य योग्यता की मांग नहीं की गई है. अपने कार्यकाल में यही महिला पर्यवेक्षिका बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के रुप मे प्रोन्नति प्राप्त करती है.
जांच प्रणाली पर नहीं है किसी की नजर, क्यों न हो प्रोटेक्शन पदाधिकारी और महिला पर्यवेक्षिका के आय- व्यय की जांच
अभी तक के क्रियाकलापों से यह बात सामने आ रही है कि घरेलू हिंसा पर होने वाली इस जांच पर किसी की नजर नहीं पड़ी है और न ही किसी का नियंत्रण है. जो भी किया जा रहा है बस मनमाने ढंग से किया जा रहा है. इस बात की आशंका से परहेज नहीं किया जा सकता कि सबल और पैसे वाले लोग इस जांच में अपनी बेगुनाही के लिए रिश्वत और ताकत का सहारा न लें. दोषियों द्वारा अपने वजूद का सहारा लेकर ऐसे जांच पर प्रभाव डालना बड़ा ही आसान सा लगता है. इन अकुशल और अज्ञानी लोगों के आय- व्यय और सम्पूर्ण सम्पतियों की जांच अति आवश्यक है, जिससे सच्चाई को सामने लाकर दोषियों पर लगाम लगाया जा सके.
घरेलू हिंसा की जांच करने वाले प्रोटेक्शन पदाधिकारी एवं महिला पर्यवेक्षिका के पास नहीं है कानूनी डिग्री
महिलाओं के ऊपर होने वाले घरेलू हिंसा जैसे विषयों के ऊपर प्रोटेवशन पदाधिकारी एवं महिला पर्यवेक्षिकाओं के पास कोई कानूनी डिग्री नहीं है, और ना ही किसी कानूनविदों द्वारा ट्रेनिंग प्राप्त करने की सूचना है. महत्वपूर्ण बात ये है कि कभी भी इन प्रोटेक्शन पदाधिकारियों या महिला पर्यवेक्षिकाओं द्वारा जिले को आवश्यक ट्रेनिंग की व्यवस्था कराने या कोई अधिवक्ता या इस क्षेत्र से संबंधित कोई जानकर उपलब्ध कराने की मांग की गई. सारा कुछ अकुशल और अज्ञानियों द्वारा यह कार्य पिछले कई सालों से खानापूर्ति कर सम्पन्न किया जा रहा है.
घरेलू हिंसा से संबंधित क्या है नियम
यदि कोई पीड़ित महिला घरेलू हिंसा अंतर्गत कार्रवाई हेतु कोई आवेदन प्रोटेवशन पदाधिकारी या पुलिस विभाग या इन अधिकारों के रक्षण हेतु किसी भी संबधित विभाग को देती है तो इसे न्यायालय भेजा जाता है. जिसके बाद न्यायालय द्वारा घरेलू हिंसा के स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच के लिए एक आदेश जिले के प्रोटेक्शन पदाधिकारी को भेजा जाता है. प्रोटेक्शन पदाधिकारी अपनी जांच रिपोर्ट न्यायालय को भेजते है. प्रोटेक्शन पदाधिकारी द्वारा भेजे गए इस रिपोर्ट को न्यायालयी प्रक्रिया में शामिल कर मामले की सुनवाई की जाती है.
बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, जमशेदपुर सदर, पूर्वी सिंहभूम ही थी 2017 और 2018 में पूर्वी सिंहभूम जिले में प्रोटेक्शन पदाधिकारी
सन 2017- 2018 में पूर्वी सिंहभूम जिले में बाल विकास परियोजना पदाधिकारी ही प्रोटेक्शन पदाधिकारी के रूप में नियुक्त थी. वर्तमान सूचना के आधार पर ये नियुक्ति नियमित है. घरेलू हिंसा के जांच प्रक्रियाओं के अनुसार यदि कोई पीड़िता घरेलू हिंसा की शिकायत संबंधित विभागों में करती है तो न्यायालय द्वारा सर्वप्रथम इसकी जांच हेतु आदेश बाल विकास परियोजना पदाधिकारी सह प्रोटेक्शन पदाधिकारी, जमशेदपुर सदर, पूर्वी सिंहभूम को भेजा जाता है. तदुपरांत बाल विकास परियोजना पदाधिकारी सह प्रोटेक्शन पदाधिकारी द्वारा अपने परियोजना अंतर्गत कार्यरत महिला पर्यवेक्षिका को जांच हेतु अधीकृत किया जाता है. आदेश प्राप्ति के बाद महिला पर्यवेक्षिका द्वारा पक्ष और विपक्ष दोनों की जांच कर जांच रिपोर्ट अपने विभाग में प्रोटेवशन पदाधिकारी को दिया जाता है. प्रोटेक्शन पदाधिकारी द्वारा इस रिपोर्ट को सत्यापित कर संबंधित न्यायालय को सौंप दिया जाता है.

Reporter for Industrial Area Adityapur