सरायकेला: जिले के चांडिल अंचल अंतर्गत चिलगु गांव में सरकारी जमीन की खुलेआम लूट का गंभीर मामला सामने आया है. जहां खाता संख्या 130 के प्लॉट संख्या 910 में स्थित करीब तीन एकड़ से अधिक सरकारी भूमि पर बाहरी तत्वों द्वारा अवैध कब्जा कर वर्षों से गैरकानूनी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं.

इस सरकारी भूमि को अवैध धंधों का अड्डा बना दिया गया है, जहां जमशेदपुर से ट्रकों में भरकर कूड़ा-कचरा लाया जा रहा है और खुलेआम डंप किया जा रहा है. अब तक लाखों टन कचरा यहां फेंका जा चुका है, जिससे पूरा इलाका जहरीली दुर्गंध और प्रदूषण की चपेट में आ चुका है. ग्रामीणों में सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक आंख मूंदे बैठे हैं.
मामला यहीं खत्म नहीं होता. सरकारी जमीन पर अवैध रूप से क्रशर प्लांट लगाकर विभिन्न कंपनियों के वेस्टेज मटेरियल से लोहा छन्नी का गैरकानूनी कारोबार धड़ल्ले से चलाया जा रहा है. क्रशर में सामग्री की पिसाई कर मेग्नेट के जरिए स्लैग से लोहा निकाला जा रहा है, जो न केवल पर्यावरण बल्कि मानव जीवन के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है.
रविवार को ग्रामीणों की शिकायत पर ग्रामप्रधान कामदेव दास के नेतृत्व में पूर्व मुखिया नरसिंह सरदार, करनीडीह के ग्रामप्रधान बहादुर लायक, प्रवीण चंद्र महतो सहित अन्य ग्रामीणों ने स्थल का निरीक्षण किया. ग्रामीणों को देखते ही माफिया गिरोह क्रशर और मशीनें बंद कर मौके से फरार हो गया, जिससे अवैध गतिविधियों की पुष्टि स्वतः हो गई.
ग्रामप्रधान कामदेव दास ने साफ शब्दों में कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जा कर खुलेआम अनैतिक और गैरकानूनी कार्य किया जा रहा है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने अंचलाधिकारी और जिले के वरीय अधिकारियों को लिखित शिकायत देने और अवैध कब्जा हटाने के साथ दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्षों से सरकारी जमीन पर चल रहे इस अवैध खेल से प्रशासन अब तक अनजान कैसे रहा. क्या यह लापरवाही है या फिर प्रशासन और भूमि माफियाओं के बीच किसी तरह का गठजोड़ है. अगर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी.

