खरसावां: चांदनी चौक में शैक्षणिक जागरूकता मंच द्वारा शुक्रवार को भारत को संविधान देने वाले महान कानूनविद डॉ भीमराव अंबेडकर की 132 वीं जयंती मनायी गयी. इस दौरान लोगों ने अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्वा सुमन अर्पित किया.

साथ ही डॉ. भीमराव अंबेडकर के समस्त मानव जाति को एकता के सूत्र में बाधंने के सपने सहित उनके विचारों को जन- जन तक पहुचाने का संकल्प लिया. साथ ही शैक्षणिक जागरूकता अभियान यात्रा निकाली गई. जो खरसावां, कुचाई, खूंटपानी, सरायकेला, गम्हारिया प्रखंड के 250 गावों का भ्रमण कर शैक्षणिक वातावरण बनाने, सामाजिक कुरीतियों को दूर करने, हक और अधिकारों के प्रति सचेत रहने, देश के निर्माण में अपना योगदान देने, भाषा, संस्कृति, सभ्यता का संरक्षण करने के प्रति जागरूकता लाने के संदेश देगे.
पहले दिन शैक्षणिक जागरूकता अभियान यात्रा खरसावां से निकलकर रिडिंग, बाबु रिड़िंग, महतो रिड़िग, पतपत, खेजूरदा आदि गांवो का भ्रमण किया. मौके पर वक्ताओं ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर के सपने को पूरा करना उनके प्रति सच्ची श्रद्वाजंलि होगी. अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के एक छोटे से गांव में हुआ था. उनका बचपन संघर्ष भरा रहा. 8 अगस्त 1930 को एक शोषित वर्ग के सम्मेलन के दौरान अंबेडकर ने अपनी राजनीतिक दृष्टि को दुनिया के सामने रखा. अंबेडकर एक अद्वितीय विद्वान और विधिवेत्ता थे, जिसके कारण भारत की आज़ादी के बाद देश के पहले कानून मंत्री बने. 29 अगस्त 1947 को अंबेडकर को स्वतंत्र भारत के नये संविधान की रचना के लिए बनी संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया. 26 नबवर 1949 को सविधान सभा ने संविधान को अपना लिया. इस दौरान मुख्य रूप से मुखिया सुनिता तापे, मनोज कुमार सोय, देवव्रत महतो, बलभद्र महतो, रामकृष्णा सोय, बुधराम सोय, वार्ड सदस्य सोनामनी मुंडा, बांसती मुंडा, माधुरी साहु, बासुदेव महतो, मदन कुमार लकड़ा, सिदेश्वर कुदादा, अरमान जामुदा, मोहनलाल बादिया, सतेन सोय, सपना बादिया, अमर उराव, शंभू मंडल, सुखलाल सोय,राम सिंह हेम्ब्रम आदि उपस्थित थे.

Reporter for Industrial Area Adityapur